समवन साहब, मुझे लगता है कि आप भूल गए हैं कि भाषा सीखने के लिए सीखने की लगन चाहिए...सीखनेवालों को दिमाग इस्तेमाल करना आता है, लेकिन शायद इस का मतलब नहीं हैं कि वो दिल कि वजह दिमाग से सोचते हैं!

बेशक़. पोल से अब तक तो ऐसा लग रहा है कि या तो न आप सही हैं न मैं, या दिमाग-ओ-दिल से पंसदीदा अभिनता का कोई ताल्लुक़ नही.अगर मैं खुद कि बात करता हूँ, तो कहूँ कि मेरी शाहरुख ख़ाँ या आमिर ख़ाँ की कोई ख़ास दिलचस्प नहीं है |
मैं भी, लेकिन मुझे आमिर अच्छा लगता है क्योंकि वो हमेशा अलग-अलग और दिलचस्प कहानियाँ चुनता है. शाहरुख़ की फ़िल्में हमेशा रोने-धोने वाली, जो अंग्रेज़ी में चिक-फ्लिक कहते हैं वैसी होती हैं..
अगर हम माधुरी दीक्षित के बारे में बात करते हैं, तो वो दूसरी बात है!
आप के लिये मैं ने एक ख़ुशख़बर पोस्ट की है - मृत्युदण्ड के प्रकाश झा एक और फ़िल्म बना रहे हैं जिसमें उन्हों ने माधुरी को मुख्य भूमिका निभाने चुना है.आजकल मुझे शाहरुख़ कि फिल्में आमिर कि फिल्मों से ज़्यादा मज़ा आ रहा है, पर वो है क्यूंकि आमिर ने ज़्यादा 'angry man' (हम जवानी कि बात नहीं करेंगे

) भूमिकाएं की हैं, जो मुझे पसंद बिलकुल नहीं |
कौन सी वाली? और आपको ऐसी भूमिकाएँ क्यों अच्छी नहीं लगती?